राहु काल क्या है?
राहु काल दिन का एक अशुभ समय माना जाता है। वैदिक ज्योतिष में सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है, और सप्ताह के हर दिन इनमें से एक भाग राहु काल कहलाता है। इस दौरान कोई भी नया या शुभ कार्य — जैसे यात्रा, गृह प्रवेश, विवाह संबंधी कार्य, नई दुकान या व्यापार आरंभ — करना टाला जाता है।
राहु काल में क्या न करें?
राहु काल में नया व्यापार, यात्रा की शुरुआत, गृह प्रवेश, सगाई-विवाह की रस्में, महत्वपूर्ण समझौते और नई खरीदारी टालने की सलाह दी जाती है। हालाँकि पहले से चल रहे काम जारी रखे जा सकते हैं — राहु काल केवल नई शुरुआत के लिए अशुभ माना जाता है। पूजा-पाठ और मंत्र जाप इस दौरान किए जा सकते हैं।
राहु काल की गणना कैसे होती है?
दिन की कुल अवधि (सूर्योदय से सूर्यास्त) को 8 बराबर भागों में बाँटा जाता है। सप्ताह के हर दिन एक निश्चित भाग राहु काल होता है — रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग। चूँकि यह सूर्योदय-सूर्यास्त पर आधारित है, इसलिए हर शहर के लिए समय थोड़ा अलग होता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
दिन का एक अशुभ समय जो सूर्योदय-सूर्यास्त को 8 भागों में बाँटकर निकाला जाता है। इसमें शुभ कार्य आरंभ नहीं करते।
हाँ, क्योंकि यह सूर्योदय-सूर्यास्त पर आधारित है जो हर शहर में अलग होते हैं।
ये भी राहु काल की तरह दिन के अशुभ माने जाने वाले समय हैं, जो अलग-अलग खंडों में आते हैं।